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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 235

Particulars as to time, place and person

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा शुद्धता और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाती है: जहाँ अभियुक्त को यह स्पष्ट सूचना मिलनी चाहिए कि कथित अपराध क्या, कब और किसके विरुद्ध हुआ, वहीं कुछ वित्तीय अपराध (जैसे लगातार होने वाली गबन) समय के साथ अनेक छोटी-छोटी लेनदेन में घटित होते हैं जिन्हें वास्तविक रूप से एक-एक कर सूचीबद्ध करना संभव नहीं होता — इसलिए विधि प्रत्येक उदाहरण की सटीक तिथि मांगने के बजाय एक युक्तिसंगत तिथि-परास और कुल-राशि जैसा समग्र वर्णन स्वीकार करती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: हर अभियोग में कथित अपराध की सटीक तिथि और समय बताना अनिवार्य है।

    तथ्य: आपराधिक न्यासभंग या छोटे-छोटे कृत्यों में बंटी हुई धन/संपत्ति की बेईमानी से हड़प जैसी अपराधों में, विधि सटीक तिथियों के स्थान पर अधिकतम एक वर्ष तक की सामान्य तिथि-परास की विशेष रूप से अनुमति देती है।