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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 32

Act to which a person is compelled by threats

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान पुराने भारतीय दंड संहिता (Section 94) की उस अवधारणा को आगे बढ़ाता है कि आपराधिक विधि उस व्यक्ति को दंडित न करे जिसके पास वास्तविक विकल्प ही न था क्योंकि उसका जीवन तत्काल खतरे में था। यह न्याय के एक मूल सिद्धांत को दर्शाता है: कानून साहस और प्रतिरोध की अपेक्षा करता है, परन्तु अलौकिक आत्म-बलिदान की नहीं—सिवाय अत्यंत गंभीर अपराधों जैसे हत्या या राज-द्रोह स्तर के अपराधों के, जहाँ समाज की रक्षा व्यक्तिगत जीवित रहने की प्रवृत्ति पर वरीय ठहरती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

भारतीय न्यायालयों ने, पूर्व दंड संहिता के समान प्रावधान की व्याख्या करते हुए, ठहराया है कि धमकी तत्काल मृत्यु की होनी चाहिए—न कि भविष्य के नुकसान, आर्थिक क्षति, या मृत्यु से कम किसी चोट की—और वह धमकी उसी क्षण विद्यमान हो जब कृत्य किया जा रहा हो। न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि जो व्यक्ति स्वेच्छा से किसी आपराधिक गिरोह (जैसे डकैत) से जुड़ता है, वह स्पष्टीकरण 1 के अनुसार बाद में इस अपवाद का संरक्षण नहीं ले सकता। न्यायिक निर्णयों ने उन मामलों में भेद स्पष्ट किया है जहाँ किसी अपहृत व्यक्ति को गले पर चाकू रखकर मजबूर किया गया (संरक्षित) बनाम वह व्यक्ति जिसने जोखिमभरी संगति स्वयं चुनी और बाद में दबाव का दावा किया (असुरक्षित)।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इस धारा के तहत किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव अपराध को माफ़ करा देता है।

    तथ्य: न्यायालय यह अपेक्षा करते हैं कि धमकी तत्काल मृत्यु की हो और वही धमकी कृत्य के ठीक उसी क्षण मौजूद हो—भविष्य के नुकसान, चोट या आर्थिक हानि का भय पर्याप्त नहीं है।

  • मिथक: यदि किसी को धमकाया गया हो तो यह प्रतिरक्षा हत्या को भी माफ़ कर सकती है।

    तथ्य: यह प्रावधान स्पष्ट रूप से हत्या और राज्य के विरुद्ध मृत्युदंड से दंडनीय अपराधों को अपवाद के दायरे से बाहर रखता है—इन्हें इस तरीके से कभी माफ़ नहीं किया जा सकता।

  • मिथक: जो व्यक्ति किसी आपराधिक गिरोह से जुड़ता है, वह बाद में यह दावा कर सकता है कि उसे साथियों ने अपराध करने के लिए मजबूर किया था।

    तथ्य: स्पष्टीकरण 1 स्पष्ट करता है कि किसी गिरोह में उसकी आपराधिक प्रकृति जानते हुए स्वेच्छा से शामिल होना, इस प्रतिरक्षा को समाप्त कर देता है—भले ही बाद में साथी धमकी दें।