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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 224

Threat of injury to public servant

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

लोक सेवक—पुलिसकर्मी, लिपिक, निरीक्षक, न्यायाधीशों के कर्मचारी और ऐसे अन्य अधिकारी—को डराने-धमकाने से मुक्त होकर अपने दायित्व निभाने चाहिए। पुरानी Indian Penal Code के समकक्ष प्रावधान से ग्रहण की गई यह व्यवस्था, अधिकारियों या उनके निकट संबद्ध लोगों को धमकाकर दबाव बनाने के प्रयासों को अपराध ठहराती है, ताकि निर्णय योग्यता और कानून के आधार पर हों, न कि दबाव में।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: धमकी तभी मानी जाएगी जब लोक सेवक को सचमुच चोट पहुँची हो।

    तथ्य: कानून मात्र ‘धमकी देने’ पर भी दंडित करता है—अपराध पूरा होने के लिए वास्तविक हानि का होना आवश्यक नहीं है।

  • मिथक: यह केवल तब लागू होता है जब आप सीधे उस अधिकारी को ही धमकाएँ।

    तथ्य: यह तब भी लागू होता है जब आप उस व्यक्ति को धमकाएँ जिसके बारे में आरोपी मानता है कि अधिकारी उसे मानता/चाहता है, जैसे परिवार का सदस्य।

  • मिथक: किसी भी कारण से किसी भी अधिकारी को दी गई हर धमकी इस धारा के अंतर्गत आती है।

    तथ्य: धमकी का उद्देश्य विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्य से जुड़ा कोई कार्य करे, उसे टाले या उससे बचे—जो धमकियाँ व्यक्तिगत और असंबंधित विषयों से हों, वे इस प्रावधान के दायरे से बाहर हैं।