Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 213
Refusing oath or affirmation when duly required by public servant to make it
Whoever refuses to bind himself by an oath or affirmation to state the truth, when required so to bind himself by a public servant legally competent to require that he shall so bind himself, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to five thousand rupees, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
शपथ और प्रतिज्ञान विधिक व प्रशासनिक कार्यवाहियों में साक्ष्य की सच्चाई का आधार होते हैं। न्यायाधीश, दंडाधिकारी (मैजिस्ट्रेट) या अन्वेषण अधिकारी जैसे अधिकारी प्रायः बयान या साक्ष्य दर्ज करने से पहले लोगों से सत्य बोलने की शपथ दिलवाते हैं। यदि लोग बिना किसी परिणाम के बस इनकार कर सकें, तो कार्यवाही की विश्वसनीयता कमजोर पड़ेगी और न्याय में बाधा आएगी। भारतीय दंड संहिता की धारा 178 से आगे बढ़ाई गई यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विधिसम्मत शपथ-आवश्यकताओं का सम्मान हो, और दंड केवल उन्हीं मामलों तक सीमित रहे जहाँ शपथ की माँग करने वाले अधिकारी के पास वास्तविक कानूनी अधिकार हो।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने सामान्यतः माना है कि इस अपराध के लिए यह सिद्ध होना चाहिए कि शपथ की माँग करने वाला लोक सेवक विधिसम्मत रूप से सक्षम था; यदि अधिकारी के पास ऐसा अधिकार न हो, तो इनकार दंडनीय नहीं है। न्यायिक व्याख्या ने शपथ लेने से मात्र इनकार को प्रश्नों के उत्तर देने या अभिलेख प्रस्तुत करने से इनकार से अलग माना है; वे अलग प्रावधानों (अब प्रश्नों का उत्तर न देने या दस्तावेज़ प्रस्तुत न करने से संबंधित धाराएँ) के अंतर्गत आते हैं। यह प्रावधान संकीर्ण रूप से पढ़ा जाता है और केवल स्वयं शपथ/प्रतिज्ञान लेने से इनकार के कृत्य पर लागू होता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कानून तब भी दंडित करता है जब अधिकारी के पास आपको शपथ दिलाने का अधिकार न हो।
तथ्य: यह कानून तभी लागू होता है जब शपथ की माँग करने वाला लोक सेवक इसके लिए विधिसम्मत रूप से सक्षम हो; यदि उसके पास यह अधिकार नहीं है, तो इस धारा के तहत इनकार दंडनीय नहीं है।
मिथक: अदालत में प्रश्नों के उत्तर देने से इनकार करना, शपथ लेने से इनकार करने के समान ही अपराध है।
तथ्य: यह धारा केवल शपथ या प्रतिज्ञान स्वयं लेने से इनकार को कवर करती है; प्रश्नों के उत्तर देने या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने से इनकार अलग प्रावधानों के तहत निपटाया जाता है।