The Constitution of India
अनुच्छेद 93
लोक सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
सत्यापन प्रतीक्षित
लोक सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष— लोक सभा, यथाशक्य शीघ्र, अपने दो सदस्यों को अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनेगी और जब-जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त होता है तब-तब लोक सभा किसी अन्य सदस्य को, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष चुनेगी ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
निर्माताओं का उद्देश्य था कि जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व करने वाली लोकसभा अपने पीठासीन अधिकारियों का चुनाव अपने ही भीतर से करे, न कि सरकार या राष्ट्रपति द्वारा उनकी नियुक्ति हो। यह ब्रिटिश संसदीय परंपरा का अनुसरण है, जिसमें अध्यक्ष स्वयं सदन का सदस्य होता है—इससे पीठासीन अधिकारी सदन के नियमों को भली-भांति समझता है और सदन का विश्वास प्राप्त करता है, साथ ही नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया आंतरिक और लोकतांत्रिक बनी रहती है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने सामान्यतः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को संसद का आंतरिक मामला माना है और खुद चुनाव-प्रक्रिया में न्यायिक दखल को सीमित रखा है। हालांकि संबद्ध प्रावधान—जैसे अनुच्छेद 94 (त्यागपत्र और पद से हटाना) और दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी क़ानून) के अंतर्गत अध्यक्ष की भूमिका—का परीक्षण हुआ है, विशेषकर अध्यक्ष की निष्पक्षता और निर्णयाधिकार के संदर्भ में; फिर भी स्वयं अनुच्छेद 93 स्वतंत्र रूप से बड़े मुकदमों का विषय नहीं रहा है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: लोकसभा का अध्यक्ष राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है।
तथ्य: अध्यक्ष का चुनाव स्वयं लोकसभा के सदस्य अपने में से करते हैं, जैसा कि अनुच्छेद 93 अपेक्षित करता है।
मिथक: उपाध्यक्ष का चयन अध्यक्ष करता है।
तथ्य: उपाध्यक्ष का भी अलग से चुनाव स्वयं सदन द्वारा होता है; उसे अध्यक्ष द्वारा न तो नियुक्त किया जाता है और न ही नामित।