The Constitution of India
अनुच्छेद 371C
मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष उपबंध— (1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति, मणिपुर राज्य के संबंध में किए गए आदेश द्वारा, उस राज्य की विधान सभा की एक समिति के गठन और कृत्यों के लिए, जो समिति उस राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से निर्वाचित उस विधान सभा के सदस्यों से मिलकर बनेगी, राज्य की सरकार के कामकाज के नियमों में और राज्य की विधान सभा की प्रक्रिया के नियमों में किए जाने वाले उपांतरणों के लिए और ऐसी समिति का उचित कार्यकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यपाल के किसी विशेष उत्तरदायित्व के लिए उपबंध कर सकेगा । (2) राज्यपाल प्रतिवर्ष या जब कभी राष्ट्रपति ऐसी अपेक्षा करे, मणिपुर राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा और संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उक्त क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में राज्य को निदेश देने तक होगा । स्पष्टीकरण— इस अनुच्छेद में, “पहाड़ी क्षेत्रों” से ऐसे क्षेत्र अभिप्रेत हैं जिन्हें राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, पहाड़ी क्षेत्र घोषित करे ।]
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
1949 में भारत में विलय के बाद मणिपुर में एक मैदानी घाटी क्षेत्र (जहाँ मैतेई समुदाय प्रमुख है) और उसके चारों ओर पहाड़ी क्षेत्र हैं जहाँ मुख्यतः नागा और कुकी-जो जनजातीय समुदाय रहते हैं, जिनकी रीति-रिवाज, भूमि-प्रणालियाँ और राजनीतिक चिंताएँ भिन्न हैं। 1972 में मणिपुर पूर्ण राज्य बना तो आशंका थी कि विधानसभा में घाटी-बहुल राजनीति पहाड़ी समुदायों के हितों को दबा सकती है। इसी को ध्यान में रखकर अनुच्छेद 371C (27वाँ संशोधन, 1971 द्वारा) जोड़ा गया, ताकि पहाड़ी प्रतिनिधियों को औपचारिक संस्थागत मंच — ‘पहाड़ी क्षेत्र समिति’ — मिले और संघ/राज्यपाल पहाड़ी प्रशासन पर सीधे निगरानी रखते रहें; यह उत्तर-पूर्व और जनजातीय क्षेत्रों के लिए अन्य विशेष प्रावधानों की भावना से मेल खाता है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
कुछ अन्य विशेष प्रावधानों की तुलना में 371C की सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशिष्ट व्याख्या पर महत्वपूर्ण दृष्टांत अपेक्षाकृत कम हैं। न्यायालयों और विद्वानों ने सामान्यतः इस अनुच्छेद के अंतर्गत राज्यपाल की ‘विशेष जिम्मेदारी’ को राज्य मंत्रिपरिषद की साधारण सलाह से पृथक, संघ-सम्बद्ध विवेकाधीन कार्य माना है, जैसा कि अन्य विशेष-प्रावधान संबंधी अनुच्छेदों (जैसे नागालैंड या सिक्किम) में मिलती-जुलती विशेष जिम्मेदारियाँ हैं। विवाद अक्सर बड़े संवैधानिक मुकदमों की बजाय राजनीतिक-प्रशासनिक स्तर पर उभरे हैं — जैसे पहाड़ी क्षेत्र समिति की प्रभावशीलता और ‘पहाड़ी क्षेत्रों’ के चिह्नीकरण को लेकर।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 371C मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों को पूर्ण स्वायत्तता या स्वशासन देता है।
तथ्य: यह प्रावधान केवल एक विधायी समिति की व्यवस्था, प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय, और राज्यपाल/संघ की निगरानी की गारंटी देता है — यह पहाड़ी क्षेत्रों के लिए कोई स्वायत्त या पृथक सरकार स्थापित नहीं करता।
मिथक: ‘पहाड़ी क्षेत्र’ स्थायी और संवैधानिक रूप से परिभाषित हैं।
तथ्य: व्याख्या के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र वही होंगे जिन्हें राष्ट्रपति विशेष आदेश द्वारा घोषित करें — परिभाषा संवैधानिक पाठ में स्थिर नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के आदेशों से बदल सकती है।