The Constitution of India
अनुच्छेद 331
लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व
लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व — अनुच्छेद 81 में किसी बात के होते हुए भी, यदि राष्ट्रपति की यह राय है कि लोक सभा में आंग्ल- भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है तो वह लोक सभा में उस समुदाय के दो से अनधिक सदस्य नामनिर्देशित कर सकेगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
एंग्लो-इंडियन समुदाय—अर्थात ब्रिटिश और भारतीय वंश का मिश्रित मूल वाला समुदाय—संख्या में छोटा और देश में बिखरा हुआ अल्पसंख्यक था, जो सामान्य चुनावों से लोकसभा सीटें जीत पाने की स्थिति में कम ही रहता था। संविधान-निर्माताओं ने स्वतंत्रता के आरंभिक वर्षों में संसद में इस समुदाय की आवाज सुनिश्चित करने हेतु यह विशेष नामांकन तंत्र बनाया। यह स्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि संक्रमणकालीन चिंता को प्रतिबिम्बित करने वाला अस्थायी सुरक्षा-उपाय था, ताकि विविध समुदायों के एकीकरण के दौर में उनकी बातें सुनी जा सकें।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 331 आज भी संविधान का हिस्सा है।
तथ्य: इसे Constitution (104th Amendment) Act, 2019 द्वारा निरसित किया गया, जो 25 January, 2020 से प्रभावी हुआ; इसके साथ लोकसभा में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के नामांकन की प्रथा समाप्त हो गई।
मिथक: राष्ट्रपति को हर बार अनिवार्य रूप से दो एंग्लो-इंडियन सदस्यों का नामांकन करना पड़ता था।
तथ्य: अनुच्छेद में कहा गया था कि राष्ट्रपति आवश्यकता होने पर ‘अधिकतम दो’ सदस्यों को नामित कर सकते हैं—यह राष्ट्रपति का विवेकाधीन अधिकार था, बाध्यकारी नहीं, और संख्या ऊपरी सीमा थी, कोई निश्चित अनिवार्यता नहीं।