The Constitution of India
अनुच्छेद 295
अन्य दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार
अन्य दशाओं में संपत्ति, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार — (1) इस संविधान के प्रारंभ से ही — (क) जो संपत्ति और आस्तियां ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य के तत्स्थानी किसी देशी राज्य में निहित थीं, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए, जो भारत सरकार इस निमित्त उस राज्य की सरकार से करे, संघ में निहित होंगी यदि वे प्रयोजन जिनके लिए ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसी संपत्ति और आस्तियां धारित थीं, तत्पश्चात् संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित संघ के प्रयोजन हों; और (ख) जो अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट राज्य के तत्स्थानी किसी देशी राज्य की सरकार की थीं, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्भूत हुई हों, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए, जो भारत सरकार इस निमित्त उस राज्य की सरकार से करे, भारत सरकार के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी यदि वे प्रयोजन, जिनके लिए ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसे अधिकार अर्जित किए गए थे अथवा ऐसे दायित्व या बाध्यताएं उपगत की गई थीं, तत्पश्चात् संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित भारत सरकार के प्रयोजन हों । (2) जैसा ऊपर कहा गया है उसके अधीन रहते हुए, पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट प्रत्येक राज्य की सरकार, उन सभी संपत्ति और आस्तियों तथा उन सभी अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं के संबंध में, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्भूत हुई हों, जो खंड (1) में निर्दिष्ट से भिन्न हैं, इस संविधान के प्रारंभ से ही तत्स्थानी देशी राज्य की सरकार की उत्तराधिकारी होगी ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
स्वतंत्रता के बाद सैकड़ों रियासतें भारत में रज़ामंदी से शामिल हुईं या विलय कर दी गईं और प्रथम परिशिष्ट के तहत ‘भाग B राज्य’ के रूप में पुनर्गठित की गईं। उनकी तिजोरियाँ, संपत्तियाँ, अनुबंध और कर्ज़ किसी न किसी को विधिक रूप से विरासत में लेने थे। अनुच्छेद 295 (पूर्व ब्रिटिश भारतीय प्रांतों के लिए अनुच्छेद 294 के साथ) संवैधानिक “विरासत-निपटान” प्रावधान था: इसने पुरानी रियासतों की परिसंपत्तियों और देयताओं को इस आधार पर संघ और राज्यों के बीच बाँटा कि संबंधित विषय आगे किस शासन-स्तर के अधीन आने वाला है, और पहले से हुए किसी विलय समझौते या वचनपत्र का आदर किया।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 295 भारत के सभी राज्यों पर लागू होता है, जिनमें पूर्व ब्रिटिश भारतीय प्रांत भी शामिल हैं।
तथ्य: यह विशेष रूप से भाग B राज्यों पर लागू होता है, जो पूर्व रियासतें थीं; पूर्व ब्रिटिश भारतीय प्रांत (भाग A राज्य) अलग से अनुच्छेद 294 के अंतर्गत आते हैं।
मिथक: यह कहना गलत है कि संघ ने स्वतः ही रियासतों की सारी संपत्ति ले ली।
तथ्य: संघ को केवल वे संपत्तियाँ और देयताएँ मिलीं जो संघ सूची के विषयों से बँधी थीं; बाकी सब नई राज्य सरकारों को चला गया, और संघ व राज्य के बीच पहले से हुआ कोई भी समझौता इस डिफ़ॉल्ट नियम को निरस्त कर सकता था।