The Constitution of India
अनुच्छेद 184
सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति
सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति— (1) जब सभापति का पद रिक्त है तब उपसभापति, यदि उपसभापति का पद भी रिक्त है तो विधान परिषद् का ऐसा सदस्य, जिसको राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा । (2) विधान परिषद् की किसी बैठक से सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति, या यदि वह भी अनुपस्थित है तो ऐसा व्यक्ति, जो विधान परिषद् की प्रक्रिया के नियमों द्वारा अवधारित किया जाए, या यदि ऐसा कोई व्यक्ति उपस्थित नहीं है तो ऐसा अन्य व्यक्ति, जो विधान परिषद् द्वारा अवधारित किया जाए, सभापति के रूप में कार्य करेगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
राज्य विधान परिषदों को, जैसे राज्यसभा को, सतत नेतृत्व की आवश्यकता होती है—कोई तो बहस की अध्यक्षता करे और व्यवस्था बनाए रखे। संविधान निर्माताओं ने अनुमान लगाया था कि सभापति का पद रिक्त हो सकता है (मृत्यु, त्यागपत्र या पदच्युत होने से) या सभापति किसी बैठक से अनुपस्थित हो सकते हैं। अनुच्छेद 184 एक स्पष्ट उत्तराधिकार शृंखला स्थापित करता है—पहले उपसभापति, फिर राज्यपाल द्वारा नियुक्त परिषद-सदस्य, या नियमों के अनुसार नामित विकल्प—ताकि सदन की कोई बैठक अध्यक्षता के बिना न रहे और कार्यवाही ठप न पड़े।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि सभापति एक ही बैठक से भी अनुपस्थित हों, तो तुरंत नया सभापति चुना जाना चाहिए।
तथ्य: एक ही बैठक की अनुपस्थिति के लिए, अनुच्छेद 184(2) में केवल उपसभापति या अन्य नामित व्यक्ति के अस्थायी रूप से कार्य करने की व्यवस्था है—नए चुनाव की आवश्यकता नहीं होती।
मिथक: राज्यपाल परिषद के बाहर से किसी भी व्यक्ति को कार्यवाहक सभापति नियुक्त कर सकते हैं।
तथ्य: अनुच्छेद 184(1) के तहत, जब सभापति और उपसभापति दोनों के पद रिक्त हों, तो राज्यपाल केवल परिषद के वर्तमान सदस्य को ही सभापति के कर्तव्यों के निर्वहन हेतु नियुक्त कर सकते हैं।